Thursday, 2 July 2015

ठंडा है चूल्हा माँ
सर्द पड़ी है दीवारे घरकी
बुझ गयी लौ दिए की
प्यासा प्यासा आँगन हैं...
तू नहीं हैं घर में तो जैसे
चमन में बहार नहीं हैं
  सोनाली
1/4/2015

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